गर्म जल कुंड | Manikaran | क्या सच में 80° उबलता पानी है? | Himachal pradesh |

मणिकर्ण के गर्म पानी का क्या है रहस्य | Manikaran Sahib | Himachal pradesh |

भारत में अनेकों ऐसे स्थान है जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं यह स्थान अपने चमत्कारों के कारण रहस्य से घिरे हुए हैं कि आज हम बात करेंगे मनाने की खूबसूरत वादियों के बीच बसे मणिकरण साहिब गुरुद्वारा की जो किसी चमत्कारी तीर्थ स्थल से कम नहीं इस गुरुद्वारे के दर्शन के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं इस गुरुद्वारे की ऊंचाई 1760 मीटर है और कुल्लू से यह 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है विराट से गुरुद्वारा मणिकरण का मुख्य आकर्षण और पार्वती नदी के किनारे पार्वती घाटी में स्थित है  




यह क्षेत्र में आने वाले सिखों और हिंदुओं दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है धार्मिक अनुष्ठान गर्म पानी के झरने प्राकृतिक हाथ मैन साथ ही इस क्षेत्र का सुंदर परिवेश निकट और दूर से यात्रियों को आकर्षित करता है माना जाता है कि इस गुरुद्वारे का दौरा गुरु नानक ने अपने पांच शिष्यों के साथ किया था इस गुरुद्वारे का उल्लेख अजय द्वारा बार वे गुरु खालसा में अधिक किया गया है जो इसे सिखों के लिए अत्यधिक महत्व का पूजा स्थल बनाता है यहां परोसा जाने वाला लंगर इस गुरुद्वारे के दैनिक अनुष्ठान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इस गुरुद्वारे की विशेषता है असली ठंड में


उबलता पानी यह लगातार पृथ्वी के इस तरह के नीचे से भाप उठती है जिसकी वजह से पानी यहां गर्म रहता है कहा जाता है कि इसके पीछे का कारण शेषनाग कब गुस्सा है जिसकी वजह से आज भी यहां हमेशा पानी उबल रहता है यह भी मान्यता है कि यहां मौजूद गंधक युक्त गर्म पानी में जो कोई भी स्नान कर ले उसकी कई बीमारियां मुख्य रूप से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है इस बर्फीली ठंड में उबलते पानी के रह इससे कई मान्यताएं जुड़ी कथा अनुसार भगवान शिव के क्रोध से बचने के लिए शेषनाग ने इस स्थान पर एक चमत्कारिक मणि को फेंका था और उस दिन से आज तक यह जारी है पौराणिक


मान्यताओं के अनुसार मणिकरण वह स्थान है जहां भगवान शिव और माता पार्वती ने मिलकर करीब 11,000 वर्षों तक तपस्या की थी एक दिन माता पार्वती ईएस कर रही थी और उसी दौरान उनके कानों में लगे आभूषणों की एक मणि पानी में गिर गई भगवान शिव ने अपने शिष्यों को आदेश दिया कि वह उसे पानी से ढूंढ कर लाए लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वह मणि किसी के भी हाथ नहीं लगी इस बात से शिवजी बहुत क्रोधित हो गए जिससे उनका तीसरा नेत्र खुल गया उसने से शक्ति पैदा हुई जिसका नाम नैना देवी नैना देवी ने कहा कि माता पार्वती कि वह मणि पाताल लोक मे शेषनाथ के पास इस बात का पता लगते ही सभी



देवता शेषनाग के पास गए और मणि को वापस मांगने लगे नेताओं के कहने पर शेषनाग ने उन्हें वह मणि वापस कर दी लेकिन यह बात बहुत बुरी लगी उन्होंने क्रोध शुक्र भरी और फल स्वरूप इस जगह पर गर्म पानी की धारा फूट पड़ी बड़े वापस मिलते ही माता पार्वती और भगवान शिव काफी खुश हुए और तभी से इस स्थान का नाम मणिकरण पड़ गया इसके साथ ही गर्म वस्त्रों के पीछे एक और कथा भी है और वह यह है कि मणिकरण में गुरु नानक अपने पास चैनलों के साथ आए थे और इस बात का वर्णन त्वरित गुरु खर्च शामिल है एक दिन लंगर बनाने के लिए गुरु नानक जी ने अपने एक चेले भाई मरदाना को दाल और आटा


मांगकर लाने के लिए कहा इसके बाद उन्होंने मर्दाना से कहा कि वह जहां बैठे हैं वहीं से पत्थर उठा कर लें जैसे ही मर्दाना ने पत्थर उठाया वहां से गरम पानी की धारा बहने लगी उस दिन से आज तक सिद्धांत पर पानी का यूज रोक बरकरार है आज गर्म पानी का इस्तेमाल यह लंगर अपने के लिए किया जाता है [संगीत] एक बड़ी करण साहिब में मौजूद थीं लंगर दुनिया भर में मशहूर है इसे गरम पानी से गुरुद्वारे के लंगर के लिए बड़े बर्तनों में चाय बनती है दाल और चावल सकते हैं इसके अलावा दर्शन के लिए आए पर्यटकों को सफेद कपड़ों की पुतलियों में चावल धागे से


बांधकर बेचे जाते हैं मान्यता है कि यदि नवविवाहित जोड़े इकट्ठी धागा पकड़कर चावलों पाते हैं तो उन्हें सुगंध विवाहित जीवन का आशीर्वाद मिलता है कि यहां आने वाले श्रद्धालु इस पानी को पीने के अधीन है कहा जाता है कि इस में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है मणिकरण में घूमने के लिए जगह एक प्राकृतिक भू-वैज्ञानिक चमत्कार है जो गरम उबलते पानी से भरा है जो यूरेनियम और रेडियोधर्मी पदार्थों से भरपूर है यह पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नैक है कि पानी काफी गर्म होता है इसलिए हर किसी को धीरे-धीरे प्रवेश करने की सलाह दीजाती है जिससे उनका शरीर धीरे-धीरे तापमान के अनुकूल हो जाए आप हमारे संतवाणी चैनल को सब्सक्राइब करें वीडियो को लाइक करें शेयर करें और हां बेल आइकॉन पर क्लिक करना बिल्कुल न भूलें ताकि हमारी किसी भी वीडियो की सूचना सबसे पहले आपको मिले थे

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